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कुर्द लड़ाके ईरानी सेना के साथ कर रहे खूनी संघर्ष
रियाद: अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर के बाद अब एक और जंग का खतरा मंडराने लगा है। हाल के दिनों में कई ईरानी सैनिक सीमा पर हुए संघर्ष में मारे गए हैं। ईरान के शफाक न्‍यूज ने 30 जून को खुलासा किया कि देश के पश्चिमी और पश्चिमोत्‍तर इलाके में मंगलवार को दो अलग-अलग घटनाओं में 4 ईरानी सैनिक मारे गए हैं। वहीं ईरान के इस्‍लामिक र‍िवोल्‍यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) की करीबी तसनीम न्‍यूज एजेंसी ने भी खबर दी है कि IRGC के दो सदस्‍य मारे गए हैं और 2 अन्‍य घायल हो गए हैं। न्‍यूज एजेंसी ने बताया कि यह हथियारबंद आतंकी हमला था जो केरमानशाह प्रांत में सीमाई शहर पावेह में किया गया था।

इजरायली अखबार यरुशलम पोस्‍ट ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया कि ईरान के कुर्दिस्‍तान प्रांत के बानेह शहर के अंदर गोलीबारी की घटना हुई है। एक बंदूकधारी ने एक पुलिस चेकप्‍वाइंट को निशाना बनाया। इस हमले में दो पुलिसकर्मी मारे गए हैं और 3 अन्‍य लोग घायल हो गए हैं। यह हमला किसने किया था, अभी इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। वहीं ईरान में कुर्दों पर नजर रखने वाली वेबसाइट Rojhelat.Info के मुताबिक हथियारबंद संघर्ष इस इलाके में अभी जारी है।

कुर्द सीमा पर ईरान में हो रहे हमले


रिपोर्ट में कहा गया है कि इस खूनी संघर्ष का केंद्र पावेह शहर है। इसके अलावा मारीवान और महाबाद शहरों में भी संघर्ष हो रहे हैं। ये इलाके एक-दूसरे के पास नहीं हैं। महाबाद मारिवान शहर से 230 किमी दूर है। पावेह मारिवान से 100 किमी दक्षिण में है। ये सभी इलाके पश्चिमी ईरान में हैं और पहाड़ी हैं जहां पर बड़ी तादाद में कुर्द रहते हैं। महाबाद में एक लाख 70 हजार लोग रहते हैं जिसमें ज्‍यादातर कुर्द हैं। Rojhelat ने बताया कि हथियारबंद संघर्ष ईरानी कुर्दिस्‍तान के अलग-अलग हिस्‍से में हो रहे हैं।

इससे पहले मारिवान और महाबाद में IRGC के सदस्‍यों पर हमला हुआ था जिसमें उन्‍हें काफी नुकसान उठाना पड़ा। रिपोर्टों के मुताबिक इस लड़ाई में पूर्वी कुर्दिस्‍तान डिफेंस यूनिट के सदस्‍य शामिल थे। ये लोग कुर्दिस्‍तान को मुक्‍त कराने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। इन्‍हें तुर्की के पीकेके गुट का समर्थन हासिल है। ईरान युद्ध के दौरान अमेरिका ने बड़े पैमाने पर हथियार कुर्दों को दिया था। ट्रंप को उम्‍मीद थी कि कुर्द जमीनी अभियान छेड़ेंगे लेकिन उन्‍होंने ऐसा नहीं किया था। इस पर ट्रंप भड़क भी गए थे लेकिन हालिया घटनाओं से लग रहा है कि कुर्द अब ईरानी सेना के खिलाफ गुर‍िल्‍ला लड़ाई छेड़ चुके हैं। यरुशलम पोस्‍ट के मुताबिक कुर्दों के कई संघर्षरत गुटों ने संकेत दिया है कि वे अब ईरानी शासन के खिलाफ संघर्ष छेड़ने जा रहे हैं।
शैलेश कुमार शुक्ला

लेखक के बारे मेंशैलेश कुमार शुक्लाशैलेश कुमार शुक्‍ल नवभारत टाइम्‍स ऑनलाइन में फॉरेन अफेयर्स एडिटर (foreign affairs editor) हैं। वे नवभारत टाइम्स की 'दुनिया' (World) टीम का नेतृत्व करते हैं। प्रिंट, न्यूज एजेंसी और डिजिटल पत्रकारिता में उनका 17 साल लंबा का अनुभव है, जिसमें उन्होंने रिपोर्टर और डेस्क पर विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है। शैलेश कुमार शुक्‍ल ने सितंबर 2017 में नवभारत टाइम्‍स ऑनलाइन जॉइन किया था। उन्‍होंने पिछले 8 वर्षों में आर्मेनिया-अजरबैजान के युद्ध, रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव, इजरायल-हमास जंग, ईरान-इजरायल संघर्ष, भारत-पाकिस्‍तान ऑपरेशन सिंदूर, तालिबान-पाकिस्‍तान तनाव, चीन-ताइवान विवाद, वेनेजुएला संकट जैसे वैश्विक घटनाक्रम का व्‍यापक कवरेज किया है। वैश्विक राजनीतिक तनाव हो या कूटनीतिक घटनाक्रम, सबसे पहले खबर देना और उसका भारत पर क्‍या असर पड़ेगा, यह भारत और दुनिया भर में बसे हिंदी के पाठकों को स्‍टोरी और वीडियो के जरिए व‍िश्‍लेषण देना शैलेश की पहली प्राथमिकता रहती है। विशेषज्ञता- फॉरेन अफेयर्स खासकर दक्षिण एशियाई राजनीतिक घटनाक्रम, डिफेंस, वैश्विक संघर्ष और उनका भारत की राजनीति और भारत के आम लोगों पर असर। पत्रकारिता अनुभव: अखबार, न्यूज एजेंसी और डिजिटल मीडिया में 17 साल से कार्यरत शैलेश कुमार शुक्‍ल ने साल 2009 में नई दिल्‍ली में अमर उजाला डॉट कॉम से अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद यूनीवार्ता, फिर प्रेस ट्रस्‍ट ऑफ इंडिया की भाषा जैसी प्रतिष्ठित न्‍यूज एजेंसियों में वर्ल्‍ड न्‍यूज डेस्‍क पर काम किया। नवभारत टाइम्‍स वेबसाइट में काम करते हुए शानदार कवरेज के लिए कई बार संस्‍थान की ओर से सम्‍मानित किया गया है। शैलेश कुमार शुक्‍ल ने साल 2005 से 2007 तक प्रतिष्ठित इलाहाबाद विश्वविद्यालय से इंटरनेशनल अफेयर्स में पोस्‍ट ग्रेजुएशन (MA) किया है। इस दौरान उन्‍होंने South Asia Regional Security सब्‍जेक्‍ट में स्‍पेशलाइजेशन किया। शैलेश कुमार शुक्‍ल ने साल 2007 से 2009 के बीच माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पोस्‍ट ग्रेजुएशन (MA) किया है। इस दौरान उन्‍होंने विदेश पत्रकार‍िता में रुचि होने की वजह से इस पर खास फोकस किया। पुरस्कार: विदेश पत्रकारिता में शानदार कवरेज के लिए 'उत्कृष्ट संपादक' पुरस्कार शैलेश के लिए खास इंटरव्यू: जोसेफ वू (Joseph Wu) जोसेफ वू ताइवान के एक अनुभवी राजनयिक हैं, जिन्होंने लंबे समय तक ताइवान के विदेश मंत्री के रूप में कार्य किया है। वर्तमान में वे ताइवान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के महासचिव के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। गीर्ट विल्डर्स (Geert Wilders) गीर्ट विल्डर्स नीदरलैंड के एक प्रमुख दक्षिणपंथी राजनीतिज्ञ और पार्टी फॉर फ्रीडम (PVV) के संस्थापक हैं। वे अपनी कट्टर आव्रजन-विरोधी नीतियों और मुखर बयानों के लिए विश्व स्तर पर जाने जाते हैं। सना हाशमी (Sana Hashmi), डॉ. सना हाशमी ताइवान-एशिया एक्सचेंज फाउंडेशन (TAEF) में एक पोस्टडॉक्टरल फेलो हैं। उनकी विशेषज्ञता और अनुभव उन्हें एशियाई भू-राजनीति के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण शोधकर्ता बनाते हैं।... और पढ़ें