नासा के स्विफ्ट टेलीस्कोप की कक्षा तेजी से नीचे गिर रही थी, जिसे बचाने के लिए कैटलिस्ट स्पेस ने लिंक स्पेसक्राफ्ट लॉन्च किया है.

NASA द्वारा जारी इस तस्वीर में Katalyst Space के LINK परियोजना के प्रमुख शोधकर्ता Kieran Wilson और स्पेस सिस्टम इंजीनियर Hunter Robertson अपने स्पेसक्राफ्ट के पास NASA के गॉडर्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर (Greenbelt, Md.) के Space Environment Simulator (SES) में खड़े हैं। यह तस्वीर 17 अप्रैल 2026 को थर्मल वेक्यूम टेस्टिंग से पहले ली गई है.
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Image Credit: AP
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Published : July 4, 2026 at 10:40 AM IST
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हैदराबाद: अमेरिकी का स्पेस एजेंसी नासा ने अपने स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी को बचाने के लिए एक खास रेस्क्यू मिशन लॉन्च किया गया है, जो काफी तेजी से धरती की कक्षा की ओर तेजी से आ रहा है. नॉर्थ्रॉप ग्रुमन ने कैटलिस्ट स्पेस टेक्नोलॉजीज के लिंक स्पेसक्राफ्ट को मार्शल आइलैंड्स के क्वाजालीन एटोल से पेगासस रॉकेट के जरिए ऑर्बिट में भेजा है. इस रॉकेट को मॉडिफाइड एयरक्राफ्ट के पेट से लॉन्च किया गया, जो अब करीब एक महीने में स्विफ्ट टेलीस्कोप तक पहुंचकर उसे कैप्चर करेगा.
2004 में लॉन्च हुआ स्विफ्ट टेलीस्कोप हाल के सोलर स्टॉर्म्स की वजह से पहले की तुलना में कहीं ज्यादा तेजी से नीचे की ओर खिसक रहा है. नासा ने इस मिशन के लिए कैटलिस्ट को करीब 30 मिलियन डॉलर का पेमेंट किया है, ताकि टेलीस्कोप की ऊंचाई बढ़ाई जा सके और वह ब्रह्मांड में होने वाले गामा-रे बर्स्ट और सुपरनोवा जैसी बड़ी घटनाओं को ट्रैक करना जारी रख सके.
कैसे होगा रेस्क्यू ऑपरेशन
फिलहाल, स्विफ्ट टेलीस्कोप धरती से करीब 360 किलोमीटर ऊपर चक्कर लगा रहा है. कैटलिस्ट का प्लान है कि इसकी ऊंचाई करीब 240 किलोमीटर और बढ़ाई जाए यानी उस ऑर्बिट तक वापस पहुंचाया जाए जहां से इसका सफर शुरू हुआ था.
लिंक स्पेसक्राफ्ट के थ्रस्टर्स धीरे-धीरे फायर होंगे, ताकि टेलीस्कोप को बिना किसी झटके के सुरक्षित तरीके से उठाया जा सके. अगर सबकुछ प्लान के मुताबिक रहा, तो स्विफ्ट सितंबर तक दोबारा अंतरिक्ष में अपनी ऑब्जर्वेशन शुरू कर सकता है. फिलहाल इसकी कक्षा को जितना हो सके उतना बचाए रखने के लिए ऑब्जर्वेशन का काम रोक दिया गया है.
नासा के हबल स्पेस टेलीस्कोप भी आने वाले सालों में नासा के ऐसे ही किसी रेस्क्यू मिशन का हिस्सा बन सकता है, क्योंकि सूरज की बढ़ती गतिविधियों की वजह से एटमॉस्फेरिक ड्रैग बढ़ने से इसकी ऊंचाई भी धीरे-धीरे कम हो रही है.
सिर्फ नौ महीनों में तैयार हुआ मिशन
कैटलिस्ट स्पेस ने इस पूरे मिशन को महज नौ महीनों में तैयार किया है, क्योंकि नासा को डर था कि अगर देरी हुई तो पतझड़ के मौसम तक टेलीस्कोप इतना नीचे आ जाएगा कि उसे बचाना मुमकिन ही नहीं होगा. ऐसा अनुमान लगाया गया था कि यह टेलीस्कोप बिना किसी बूस्ट के क्टूबर तक धरती के वायुमंडल में जलकर खत्म हो सकता था. खराब मौसम और तकनीकी दिक्कतों की वजह से लॉन्च को कई बार आखिरी वक्त पर टालना भी पड़ा.
यह मिशन आने वाले समय में सैटेलाइट सर्विसिंग इंडस्ट्री के लिए भी एक अहम कदम साबित हो सकता है, क्योंकि इससे यह साबित होगा कि पुराने और खराब हो रहे स्पेसक्राफ्ट को दोबारा जिंदा किया जा सकता है.
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